तालाब बचाने जल सत्याग्रह
रायपुर/दुर्ग / भिलाई।भिलाई नगर निगम के वार्ड क्रमांक 22 कुरुद में बदहाल नकटा तालाब को लेकर लोगों का गुस्सा अब सड़क से पानी तक पहुंच गया है। सालों से जलकुंभी से पटा पड़ा नकटा तालाब अब आंदोलन का केंद्र बन गया है। सफाई नहीं होने से नाराज वार्डवासी खुद तालाब के कमर भर पानी में उतर गए हैं और अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक निगम प्रशासन सफाई शुरू करने की लिखित तारीख नहीं देता, तब तक वे तालाब से बाहर नहीं निकलेंगे।
सिर्फ नकटा नहीं, तीन तालाब बदहाल,
मामला सिर्फ नकटा तालाब का नहीं है। वार्डवासियों का कहना है कि इसके अलावा दर्री तालाब और घासीदास तालाब की भी हालत बेहद खराब है। तीनों तालाब पूरी तरह से जलकुंभी से ढक चुके हैं। पानी दिखाई देना बंद हो गया है और बदबू के कारण आसपास रहना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और तालाब का पारंपरिक उपयोग भी बंद हो गया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इसको लेकर कई बार निगम आयुक्त, जोन आयुक्त और स्वास्थ्य विभाग को ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। कागजों में सफाई दिखा दी जाती है, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं होता।
5 अक्टूबर का अल्टीमेटम, 6 अक्टूबर का झूठा वादा,
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भानुप्रताप सिंह ने बताया कि हमने निगम आयुक्त सुरुचि सिंह को 5 अक्टूबर तक सफाई शुरू करने का अल्टीमेटम दिया था। उसके बाद निगम की तरफ से 6 अक्टूबर से काम शुरू करने का आश्वासन मिला था। 6 अक्टूबर को हम सुबह से इंतजार करते रहे, लेकिन मौके पर एक भी कर्मचारी या मशीन नहीं पहुंची। इसलिए हमें मजबूर होकर जल सत्याग्रह का रास्ता अपनाना पड़ा।
जैसे ही लोग तालाब में उतरे, निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर जोन आयुक्त, स्वास्थ्य अधिकारी और निगम की पूरी टीम पहुंची। अधिकारियों ने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन लोग लिखित आश्वासन पर अड़ गए। वार्ड पार्षद अनिता साहू के पति अजय साहू भी समर्थन में तालाब में उतरकर आंदोलन में शामिल हो गए, जिससे प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया।
निगम का अजीब तर्क – मशीन दूसरे निगम को दे दी,
वहीं इस पूरे मामले पर निगम के स्वास्थ्य प्रभारी जावेद खान का बयान और भी चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि छठ पूजा से पहले तालाब की सफाई कराई गई थी। तालाब मछुआरा संघ को दिया गया है और जलकुंभी निकालने में दिक्कत आ रही है।
सबसे बड़ी बात उन्होंने यह कही कि निगम के पास जलकुंभी निकालने की मशीन उपलब्ध नहीं है, क्योंकि मशीन दूसरे नगर निगम को दे दी गई है। अब जलकुंभी को मैन्युअल तरीके से, यानी मजदूरों से हटाने की बात कही जा रही है।
निगम के इस जवाब से वार्डवासी और ज्यादा आक्रोशित हैं। उनका सवाल है कि जब भिलाई के तालाब खुद जलकुंभी से पटे हैं तो मशीन दूसरे निगम को क्यों दी गई? और अगर मैन्युअल सफाई ही करनी थी तो पिछले एक साल से क्यों नहीं की गई?
फिलहाल कुरुद का नकटा तालाब आंदोलन स्थल बना हुआ है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं तालाब के किनारे बैठकर नारेबाजी कर रहे हैं, जबकि कई युवा पानी के अंदर ही डटे हुए हैं। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ तालाब की सफाई की लड़ाई नहीं, बल्कि निगम की लापरवाही के खिलाफ लड़ाई है।
